बाबरी मस्जिदः 27 साल बाद 30 सितंबर को आएगा फैसला; आडवाणी, समेत 32 आरोपियों को अदालत में मौजूद रहना होगा

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बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में कुल 32 आरोपी हैं। इनमें भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह और उमा भारती सहित अन्य लोगों के नाम शामिल हैं

बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में सीबीआई की विशेष अदालत 30 सितंबर को अपना अंतिम फैसला सुनाएगी। सीबीआई कोर्ट के जज सुरेंद्र कुमार यादव ने बुधवार को इस मामले में अंतिम फैसला देने के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की है। बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में कुल 32 आरोपी हैं। इनमें भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह और उमा भारती सहित अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। इस महीने की शुरुआत में सीबीआई अदालत ने सभी 32 आरोपियों के बयान दर्ज करके मामले में सभी कार्यवाही पूरी कर ली थी।

वकील केके मिश्रा ने बताया कि सीबीआई की अदालत ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में अंतिम फैसला देने के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की है। मिश्रा मामले के 32 में से 25 आरोपियों की वकालत कर रहे हैं, जिनमें भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती सहित अन्य शामिल हैं

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ में बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की सुनवाई करने वाली विशेष सीबीआई अदालत की समय सीमा को 30 सितंबर तक बढ़ा दिया था। अयोध्या मामले में फैसला सुनाने की शीर्ष अदालत की समय सीमा 31 अगस्त को समाप्त हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 19 जुलाई 2019 को अयोध्या मामले में आपराधिक मुकदमे को पूरा करने के लिए छह महीने की समय सीमा बढ़ा दी थी। साथ ही साथ अंतिम आदेश के लिए नौ महीने की समय सीमा भी निर्धारित की थी। इस वर्ष 19 अप्रैल को समय सीमा समाप्त हो गई और विशेष न्यायाधीश ने 6 मई को शीर्ष अदालत को पत्र लिखकर समय बढ़ाने की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई को 31 अगस्त तक की नई समयसीमा जारी की और तब तक फैसला सुनाने के निर्देश दिए थे। हालांकि, अगस्त में शीर्ष अदालत ने फिर से एक बार 30 सितंबर तक अंतिम फैसला देने के लिए समय सीमा बढ़ा दी थी। 19 अप्रैल 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल जज से प्रतिदिन सुनवाई कर दो साल में मामले का निपटारा करने का आदेश दिया था।

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