सरकारी महकमों में बजेगी सिर्फ BSNL, MTNL की घंटी, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

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मंत्रालय हो या सरकारी दफ्तर, हर जगह अब BSNL-MTNL की सर्विस अनिवार्य

आर्थिक संकट से जूझ रही सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) और महानगर संचार निगम लिमिटेड (MTNL) के हित में केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. दरअसल, केंद्र सरकार ने अपने सभी मंत्रालयों, सार्वजनिक विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के लिए इन दोनों टेलीकॉम कंपनियों की सेवाओं के उपयोग को अनिवार्य कर दिया है.

दूरसंचार विभाग (डीओटी) द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, ‘‘भारत सरकार ने अपने सभी मंत्रालयों/ विभागों, सीपीएसई, केंद्रीय स्वायत्त निकायों द्वारा बीएसएनएल और एमटीएनएल की सेवाओं के अनिवार्य रूप से इस्तेमाल की मंजूरी दी है.’’ इसमें कहा गया कि बीएसएनएल और एमटीएनएल की टेलीकॉम सेवाओं के इस्तेमाल को अनिवार्य करने का निर्णय मंत्रिमंडल ने लिया. दूरसंचार विभाग ने सभी मंत्रालयों, विभागों, सीपीएसई और केंद्रीय स्वायत्त संगठनों से कहा है कि वे इंटरनेट, ब्रॉडबैंड, लैंडलाइन और लीज्ड लाइन जरूरतों के लिए बीएसएनएल या एमटीएनएल नेटवर्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें.

BSNL, MTNL का ही कनेक्शन अनिवार्य

इस मेमोरेंडम यानी ज्ञापन पत्र को केंद्र सरकार की तरफ से वित्त मंत्रालय से सलाह के बाद 12 अक्टूबर को सभी सचिवों और विभागों को भेजा गया है. टेलीकॉम डिपार्टमेंट की ओर से जारी इस मेमोरेंडम में कहा गया है कि ‘सभी मंत्रालयों/विभागों से अपील है कि वो CPSEs/केंद्रीय स्वायत्त संस्थानों को इंटरनेट/ब्रॉडबैंड, लैंडलाइन और लीज्ड लाइन की जरूरतों के लिए अनिवार्य रूप से BSNL/MTNL के नेटवर्क का इस्तेमाल करने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी करें.’

घाटे में हैं BSNL, MTNL

केंद्र सरकार का ये फैसला घाटे में चल रही दोनों सरकारी टेलीकॉम कंपनियों BSNL और MTNL के लिए राहत की खबर है, जो लगातार वायरलाइन सब्सक्राइबर को खो रही हैं. वित्त वर्ष 2019-20 में BSNL को 15,500 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था, जबकि MTNL ने 3,694 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया था.

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