सादिक जमाल एनकाउंटर के मामले में पूर्व डीवायएसपी एसपी तरुण बारोट और छत्रसिंह चुडास्मा डिस्चार्ज

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वर्ष 2003 में सादिक जमाल फेक एनकाउंटर मामले में सीबीआई कोर्ट ने दो और आरोपियों को डिस्चार्ज किया है। सीबीआई कोर्ट ने शनिवार को पूर्व डीवायएसपी तरुण बारोट और पुलिसकर्मी छत्रसिंह चुडास्मा को डिस्चार्ज कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि दोनों के खिलाफ कोर्ट की कार्यवाही चलाने जितना पुरावा नहीं है। इसलिए डिस्चार्ज करना ही उचित है।

गौरतलब है कि 24 नवंबर को स्पे. सीबीआई कोर्ट ने इस मामले में शामिल पुलिस कर्मचारी आर.एल.मावाणी और अजयपाल यादव को भी दोषमुक्त घोषित किया था। सादिक जमाल एनकाउंटर केस में स्पे. सीबीआई कोर्ट में तरुण बारोट और छत्रसिंह चुडास्मा ने डिस्चार्ज अर्जी की थी। जिसमें उनके ऐडवोकेट रोहित वर्मा और ब्रिजराजसिंह झाला ने दलील की थी कि दोनों निर्दोष हैँ। उन्हें फंसाया गया है।

तरुण बारोट का इस मामले से कोई लेनादेना नहीं है। पूरी चार्जशीट देखने से तरुण बारोट और सादिक को मुंबई से अहमदाबाद लाया गया। इसका कोई ना तो गवाह है और ना इसकी कोई सबूत है। वे 2 से 4 जनवरी 2004 को मुंबई गये थे। केवल इतनी ही सबूत है। इसके आधार पर केस नहीं चलाया जा सकता।

तरूण बारोट एनकाउंटर्स के समय वहां हाजिर नहीं थे। छत्रसिंह चुडास्मा के खिलाफ गवाहों की कोई जुबानी नहीं है और उनके खिलाफ दस्तावेजी सबूत भी नहीं है। इस मामले में इसके पहले भी डिस्चार्ज हुए आरोपियों की तुलना में इन दोनों का रोल बहुत कम है। इसलिए इन्हें डिस्चार्ज करना चाहिए। हालांकि सीबीआई द्वारा दलील दी गयी कि तरुण बारोट सादिक को मुंबई ले गये थे उनके खिलाफ पूरी साबिती है। इसके अतिरिक्त दस्तावेजी साबिती भी है।

सादिक जमाल आतंकी ना होते हुए भी उसका बोगस एनकाउंटर किया गया था। इस बारे में आरोपियों के खिलाफ पूरी साबिती है। ऐसे समय ऐसे आरोपियों को डिस्चार्ज नहीं किया जा सकता। दोनों पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद तरुण बारोट और छत्रसिंह चुडास्मा को डिस्चार्ज कर दिया।

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