भूतान की तरह म्यांमार को भी भारत बनाये अपना दोस्त-मामला ही खत्म.!

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भारत के निकट म्यान्मार में लोकतंत्र की हत्या- देश सेना के हाथों मे

लोकतंत्र की मांग करनेवालों की निर्मम हत्याओं का दौर..

भारत नेपाल- म्यान्मार-श्रीलंका को अपने साथ रखें

नेपाल के बाद म्यान्मार में भी चीन का चालबाजी..!

भूतान अलग देश फिर भी भारत का सच्चा साथी

(नेट डाकिया- विशेष रपट)

भारत के आसपास,जितने भी पडोसी देश है उसमें से एक म्यांमार देश नेपाल और भूतान की तरह छोटा देश है. म्यांमार में सेना ने 1 फरवरी को वहां की लोकतांत्रिक सरकार का तख़्तापलट कर दिया था. स्टेट काउंसलर आंग सान सू की को गिरफ्तार कर लिया गया. आंग सान सू की की पार्टी ने नवंबर 2020 में हुए चुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी. इस पर सेना ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया था. हालांकि इलेक्शन ऑब्जर्बर ने किसी भी तरह की धांधली को खारिज कर दिया था. तब से म्यांमार की जनता सड़कों पर है. लोग अहिंसक और रचनात्मक तरीकों से तख़्तापलट का विरोध कर रहे हैं.

सेना द्वारा तख्तापलट के बाद लोकतंत्र की बहाली के लिये भीषण जंग चल रहा है. देश की कमान अपने हाथों मे लेनेवाली आर्मी ने कत्लेआम शुरू कर दिया है. करीब 400 निर्दोष नागरिको की सेना द्वारा हत्या कर दी गई.म्यांमार का पुरानानाम बर्मा है और रंगून उसकी राजधानी है. बोलीवुड की मशहुर अदाकार हेलेन ईसी देश की है. आज जब कई बर्मीझ सेना की गोली से बचने के लिये भारत में शरण लेने आ रहे है वैसे ही की साल पहले बर्मा में ऐसे ही एक हिंसा से बचने के लिये हेलेन अपनी मातापिता के साथ भारत आई थी.वह सलमान की दुसरी मा है. एक रिपोर्ट में मिजोरम के एक अधिकारी के हवाले से बताया गया कि पिछले महीने के सैनिक तख्तापलट के बाद कम से कम 1000 लोग सीमा पार कर चुके हैं. इनमें से 100 लोगों को वापस भेजा गया था, लेकिन वो फिर से भारत में ही छुप गए हैं.

इन हालातों के बीच मणिपुर सरकार ने एक आदेश जारी किया. सिविल सोसाइटीज़ और जिला प्रशासन को म्यांमार से आने वाले किसी भी शरणार्थी के लिए खाने-पीने या शरण देने की व्यवस्था न करने को कहा गया. मणिपुर की एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने कहा कि जो भी म्यांमारवासी भारत में शरण लेने की कोशिश करें, उन्हें ‘विनम्रतापूर्वक’ मना कर दिया जाए. इस पर विवाद खड़ा हो गया. विवाद इतना बढ़ा कि ये आखिर मानवता को देखते हुये मणिपुर सरकार को अपना ये आदेश वापस लेना पड़ा.हालांकि मिझोराम ने शरण देने की बात कही.

भारत को शर्णार्थी से पुराना रिश्ता है. भाबरत विभाजन के बाद लाखो करोडो लोग हाल के पाकिस्तान से शर्णार्थी बन कर भारत आये थे. 1971 के बांग्लादेश युध्ध के दौरान कई बांग्लादेशी शर्णार्थी बन भारत आये और बंगाल-आसाम में बस गये. घूसपैठ ईन दो राज्यो में हर बार चुनावी मद्दा बमता है. कितने घूसपैठियो को कब निकाले जायेंगे कोई नहीं जानता. लेकिन ये बात जाहिर है कि नेपाल की तरह म्यांन्मार में भी तख्तापलट के पीछे विस्तारवादी चीन का हाथ हो शकता है.

भारत की विदेश नीति कीसी देश को चीन की तरह हडपना नहीं है. लेकिन भारत नें जैसे भूतान को अलग राष्ट्र होते हुये भी अपने साथ रखा और बिना पासपोर्ट के दोनों देशो के लोग बिना पासपोर्ट आ-जा रहे है. वैसे ही म्यान्मार को भी अपने साथ रखने की रणनीति बनानी चाहिये.भारत अमरिका और युनो संस्था को विश्वास में लेकर म्यान्मार को अपने साथ दोस्त की तरह रखने से भारत पर शरणार्थी को जो बोज पडता है उससे बचा जा शकता है. क्योंकि आसा पहली बार नहीं हो रहा म्यान्मार में. आये दिन वहां सेना द्वारा चीन जैसे विस्तारवादी देशो के ईशारे पर लोकतंत्र की हत्या कर सेनाराज की स्थापना करते है. हाल में जो चल रहा है उसमें अमरिका समेत बडे और शक्तिशाली देशो की दरम्यानगीरी के बाद सेना बैरेक में वापिस जायेंगी लेकिन ये कोई आखिरी नहीं होंगा. कुछ समय बाद फिर से तख्तापलट और फिर से म्यान्मार के कई लोग भारत में घूस आयेंगे और भारत के नजदीकी राज्यो में बस जायेंगे. भारत के उन सभी राज्यो में रहते नागरिक और

म्यान्मार के नागरिको के बीच खास कुछ फर्क नहीं.चहेरा, वस्त्रपरिधान आदि समान लगते है. ऐसे में विदेश नागरिको को पहचानना मुश्किल हो सकता है. शरणार्थी की समस्या की वजह से नहीं लेकिन अपने आसपास के देशो में शांति बनी रहेंगी तो भारत पर घूसपैठियों की समस्या कम होंगी. आसाम और बंगाल में घूस आये लाखो बांग्लादेशीयों की समस्या अभी बरकरार है. उसका कोइ कायमी हल नहीं निकल रहा ऐसे में नेपाल और

म्यान्मार जैसे छोटे देशो में चीन द्वारा हस्तक्षेप से भारत पर भी प्रभाव पडता ही है. नेपाल ने चीन के प्रभाव में आकर भारत से पंगा लिया है. उसका अभी तक हल नहीं निकला. भारत ने नेपाल को मनाने की और चीन के प्रभाव से बाहर लाने के कई कोशिश की लेकिन चीन ने नेपाल की राजनीति में अपने पैर जमाये है. भारत को चाहिये की नेपाल और म्यान्मार में भारत की पसंदगी की सरकारे बने जो भारत को परेशान न करे.

नेपाल और म्यान्मार के बाद श्रीलंका को भी अपने पक्ष में रखना होगा. असल में चीन भारत को घेरने के लिये इन छोटे देशो में अपनी जडे मजबूत करने की कोशिश में लगा है. चीन ने भारत के साथ विश्वासघात किया है. गलवान में चीनने भारत के 20 जवानों की हत्या कर अपना असली चेहरा दिखाया तब जा कर भारत को लगा कि चीन का भरोसा नहीं.

विदेशी कूटनीति के तहत चीन को जवाब देने के लिये और भारत के आसपास के देशो में पाकिस्तान और चीन को छोडकर सभी छोटे छोटे देशो को पैरो तले नहीं लेकिन अपने साथ सच्चे दोस्त की तरह रखने की रणनीति नहीं बनाई तो भारत की सभी सीमा पर आग के शोले भडकते रहेंगे और भारत को उसमें ही उलझाने में दुश्मन देश लगा रहेंगा. तो देर काहे की- अब की बार…म्यान्मार…!!

संपादकः दिनेश राजपूत

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