मकर संक्रांति 2020 : ऐसे करें भगवान सूर्य की पूजा, होगी सभी मनोकामना पूरी

मकर संक्रांति कि सूर्य के संक्रमण के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है. इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. सूर्य देव का ऐसा राशि परिवर्तन साल में एक बार ही होता है.

शास्त्रों के अनुसार सूर्य के धनु राशि से निकलकर मकर राशि में जाने से इस त्यौहार का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है. सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने से ही सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं.

शास्त्रों में उत्तरायण को देवताओं का दिन माना जाता है, यानि इस दिन से किसी भी शुभ कार्य का प्रारंभ करने से देवताओं का साक्षात् साथ मिलता है. परिणामस्वरूप कार्य सफलतापूर्वक संपन्न होते हैं.

इस दिन सूर्योदय के पूर्व स्नान करने का विशेष महत्व माना गया है. इसलिए इस दिन प्रातःकाल जगकर पवित्र नदी में स्नान करें. यदि नदी में स्नान करना संभव ना हो तो किसी तीर्थ के जल से स्नान करें.

यदि किसी भी तीर्थ का जल या पवित्र नदी का जल उपलब्ध न हो तो दूध-दही के मिश्रण से से स्नान करें. स्नान के पश्चात् नित्य कर्म और अपने आराध्य की पूजा-अर्चना करें.

मकर संक्रांति के त्यौहार के दौरान गाय या भैंस का दूध निकालना, मैथुन क्रिया और काम विषय के कार्य भी नहीं करना चाहिए.

मकर संक्रांति के दिन देश के प्रायः सभी भागों में पतंग उड़ने का भी विशेष महत्व है. इसलिए यदि संभव हो तो इस दिन पतंग उडाएं। कई स्थानों पर इस दिन खिचड़ी खाने का भी विशेष महत्व है.

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