Ratan Tata Birthday जीवन में सफल होना है तो रतन टाटा से ले सकते हैं ये सीख

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Ratan Tata Birthdayटाटा ग्रुप की पहचान माने जाने वाले रतन टाटा का आज जन्मदिन है। जीवन में कई सफलताएं देख चुके रतन टाटा के नाम एक सफल इंसान और सफल बिजनेसमैन के रूप में मिसाल दी जाती है। बेहद शांत और सौम्य स्वभाव के रतन टाटा की खासियत ये है कि अपार सफलता के बाद भी अपनी कंपनी के छोटे से छोटे कर्मचारी से हमेशा प्यार से मिलते हैं। छोटे हो या बड़े सभी को भरपूर सम्मान देते हैं। आइए जानते हैं रतन टाटा के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें –

ऐसा था शुरुआती जीवन व करियर

रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर, 1937 को गुजरात के सूरत शहर में हुआ था। रतन टाटा एक पूंजीपति परिवार में जन्मे थे, लेकिन उनका बचपन अच्छा नहीं बीता था। माता-पिता में अनबन के चलते दोनों अलग रहने लगे थे। इसलिए रतन टाटा को माता-पिता का साथ में प्यार नहीं मिल पाया था। ऐसे में उनका पालन-पोषण दादी ने किया था। बाद में पढ़ाई के लिए मुंबई आ गए थे। गौरतलब है कि रतन टाटा, टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा के दत्तक पोते नवल टाटा के बेटे हैं। मुंबई में पढ़ाई पूरी करने के बाद रतन टाटा ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से आर्किटेक्चर बीएस और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एडवांस मैनेजमेंट प्रोग्राम किया।

इसलिए रतन टाटा ने नहीं की शादी

रतन टाटा की उम्र 83 साल हो चुकी है और उन्होंने जीवनभर शादी नहीं की। कई मैग्जीन और न्यूजपेपर में कई बार उनकी निजी जिंदगी के बारे में लिखा गया है, लेकिन एक बार तो उन्होंने खुद ही इस बारे में खुलकर बात करते हुए शादी नहीं करने का कारण बताया। रतन टाटा ने बताया था कि ऐसा नहीं है कि उन्होंने शादी करने के बारे में नहीं सोचा था। तीन-चार बार उन्होंने शादी करने का मन भी बनाया था लेकिन अक्सर ऐसी परिस्थितयां बन जाती थी कि शादी नहीं हो पाई्। हमेशा काम में ज्यादा व्यस्त रहा हूं। उन्होंने इस संबंध में ज्यादा बात न करते हुए यह कहा कि अगर शादी कर लेते तो जिंदगी और जटिल हो सकती थी।

रतन टाटा से ले सकते हैं ये सीख

– रतन टाटा का मानना है कि जो लोग आप पर पत्थर फेंकते हैं, उसका उपयोग स्मारक बनाने में करना चाहिए। आगे बढ़ने के लिए हमारे जीवन में उतार-चढ़ाव जरूरी है, क्योंकि ईसीजी में सीधी लाइन का मतलब होता है, हम जिंदा नहीं है।

-अगर आप तेज चलना चाहते हैं, तो अकेले चलें। पर अगर आप लंबा चलना चाहते हैं, तो सबको साथ लेकर चलें। रतन टाटा का मानना है कि मैं सही फैसले लेने में विश्वास नहीं करता, मैं फैसले लेता हूं और फिर उन्हें सही साबित करता हूं।3

-रतन टाटा का कहना है कि लोहे को उसकी खुद की जंग के अलावा कोई नहीं नष्ट कर सकता। इसी तरह किसी व्यक्ति को उसके खुद के माइंडसेट के अलावा कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता है।

– रतन टाटा के कारोबारी जीवन में कई ऐसे अवसर आए हैं, जब विरोधियों ने उनका खूब विरोध किया, लेकिन रतन टाटा कभी हमलावर नहीं हुए। उन्होंने कभी जवाब नहीं दिया। रतन टाटा का मानना है कि अगर आपने गलत नहीं किया है तो एक न एक दिन वह अपने आप सही साबित हो ही जाएंगे।

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