ट्रेडिंग में आई रुकावट पर Sebi ने NSE से मांगी रिपोर्ट

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सेबी तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से निवेशकों को होनेवाले नुकसान पर मुआवजा देने की योजना पर काम कर रहा है

NSE मार्केट में बीते दिन तकनीकी खामी कारण बंद हो गया था और सभी सौदे रद्द हो गये थे। इसके बाद 3.45 को मार्केट शुरु हुआ था। अब सेबी ने एनएसई से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है। शुक्रवार तक जवाब पेश करने का आदेश दिया है।

बता दें कि कारोबारी दिन के अधिकांश हिस्से में तकनीकी गड़बड़ी की वजह से ट्रेडिंग गतिविधि ठप्प रही। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने मनीकंट्रोल को जानकारी दी है कि उम्मीद है कि एनएसई अगले 48 घंटे में सेबी के पास अपनी यह रिपोर्ट दाखिल कर देगी। प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद एक विस्तृत रुट एनलिस्ट  रिपोर्ट भी सेबी को दी जाएगी।

इस सूत्र ने आगे बताया है कि एनएसई को अपनी बुनियादी तकनीकी सुविधाओं पर काम करने की जरुरत है जिनमें रेगुलर बेसिस पर दिक्कतें आती रही है। एनएसई को  इस तरह की गड़ब़ड़ियों से निपटने के  लिए टेक्नोलॉजी पर और ज्यादा निवेश करने की जरुरत है। हालांकि एनएसई अपने प्रस्तावित IPO के पहले इस तरह के बड़े खर्चे से बचना चाहती है। क्योंकि टेक्नोलॉजी पर खर्च किए गए पैसे का असर उसके बैलेंसशीट पर देखने को मिल सकता है और एनएसई आईपीओ के पहले बैलेंसशीट में  कमजोरी से बचना चाहती है।

मुंबई स्थित एक ब्रोकर ने गोपनीयता बनाए रखने के शर्त पर कहा कि एक्सचेंज में इस तरह की तकनीकी गड़बड़ी खासकर एक्सपायरी वाले दिन के पहले अपने में बहुत बड़ी चिंता का विषय है। इस ब्रोकर ने आगे कहा कि पिछले कई मामलों  में एक्सपायरी के करीब या हाई उतार-चढ़ाव के दिनों में ही निफ्टी की इस तरह की तकनीकी गड़बड़ियां देखने को मिली है। आज भी मंथली एक्सपायरी के पहले इस तरह की गड़बड़ी आई है।

पिछले साल 4 जून को जब  लोअर प्राइस पर क्लोजिंग की उम्मीद थी तो बैंक निफ्टी के रेट नहीं  अपडेट हो रहे थे। इसी तरह की स्थितियां 10 जुलाई 2017 को भी उत्पन्न हुई थीं जब सिर्फ एक दिन पहले ही सेबी ने पी-नोट्स पर प्रतिबंध लगाने का एलान किया था। 

यह मात्र संयोग है या कुछ और रेगुलेटर को इसकी जांच करनी चाहिए।

इसके पहले सेबी ने एक्सचेंज पर तमाम तकनीकी गड़बड़ियों का हवाला देते हुए 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। सेबी तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से निवेशकों को होनेवाले नुकसान पर मुआवजा देने की योजना पर काम कर रहा है। हालांकि मुआवजे के तरीके पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है।

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