महाराष्ट्र सरकार को झटक, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से किया इंकार

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वसूली कांड के आरोपों पर बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद महाराष्ट्र के गृहमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले अनिल देशमुख को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका लगा है. बॉम्बे हाईकोर्ट की तरफ से सीबीआई जांच के आदेश के खिलाफ गुहार लगाने वाले अनिल देशमुख की याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से इनकार कर दिया. 

सीबीआई की तरफ से की जा रही प्राथमिक जांच जारी रहेगी. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा- “यह 2 बड़े पद पर बैठे लोगों से जुड़ा मामला है. लोगों का भरोसा बना रहे, इसलिए निष्पक्ष जांच ज़रूरी है. हम हाईकोर्ट के आदेश में दखल नहीं देंगे.”

इस मामले पर सुनवाई के समय अनिल देशमुख की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पेश हुए. जबकि, परमबीर सिंह के लिए मुकुल रोहतगी और महाराष्ट्र सरकार का पक्ष रखने के लिए अभिषेक मनु सिंघवी और जयश्री पाटिल के लिए साल्वे आए. इस दौरान अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अनिल देशमुख की बातों को सुना जाना चाहिए था. आइये जानते हैं कोर्ट में किसने क्या कहा?

‘अनिल देशमुख को नहीं मिला पक्ष रखने का मौका’

अभिषेक मनु सिंघवी- पहले 13.1 (महाराष्ट्र की याचिका) को देखिए

अनिल देशमुख के वकील कपिल सिब्बल ने कहा- मुझे इस पर कोई आपत्ति नहीं
अभिषेक मनु सिंघवी- 21 मार्च को वकील जयश्री पाटिल ने शिकायत दी. 23 को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी. बाद में परमबीर ने भी फ़ाइल किया. 31 मार्च को सिर्फ इस पहलू की सुनवाई हुई कि याचिकाएं सुने जाने लायक हैं या नहीं. लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने विस्तृत आदेश पारित कर दिया. हमें ठीक से जिरह का मौका ही नहीं दिया गया.
जस्टिस कौल- जब गृह मंत्री पर आरोप पुलिस कमिश्नर ने लगाए हों तो क्या यह CBI जांच के लिए फिट मामला नहीं है.

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