गुजरात में तमिल भाषा की एकमात्र स्कूल बंद करने से छात्रों का भविष्य खतरे में, अभिभावकों ने इच्छा मृत्यु की मांग की

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कोरोना महामारी के कारण गुजरात में तमाम शिक्षा संस्थान फिलहाल बंद है। जिसमें गुजरात की एकमात्र तमिल पाठशाला भी शामिल है। हालांकि राज्य सरकार ने अचानक अहमदाबाद में स्थित एकमात्र तमिल पाठशाला स्थाई तौर पर बंद करने का निर्णय करने पर छात्र और उनके अभिभावकों में चिंता फैल गई है। अभिभावकों ने तमिल स्कूल बंद करने से अहमदाबाद जिला कलेक्टर से इच्छा मृत्यु की मांग की है।

महामारी के बीच छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है। हालांकि अहमदाबाद में स्थित गुजरात की एकमात्र तमिल स्कूल बीच सत्र में अचानक शहर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा बंद करने का निर्णय किया है। जिसके कारण छात्र और उनके अभिभावकों में आक्रोश फैल गया है।

अभिभावकों का कहना है कि राज्य सरकार तमिल भाषा के खिलाफ होने का इस निर्णय से साबित हो रहा है। बीच सत्र में तमिल स्कूल बंद करने के निर्णय से छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। अनेकों बार इस सम्बंध में शिक्षा अधिकारियों को शिकायत करने के बाद भी तमिल स्कूल फिर से शुरू करने का निर्णय नहीं हुआ है।

अहमदाबाद के पूर्व कार्पोरेटर ज्योर्ज डायस ने बताया कि तमिल स्कूल बंद होने से छात्रों का भविष्य खतरे में है। अभिभावकों में अपने बच्चों को लेकर चिंता फैल गई है। ऐसा लग रहा है सरकार तमिल भाषा के विरोध में है। राज्य सरकार संविधान के मूलभूत अधिकारों का हनन कर रही है। जिसके कारण अभिभावकों ने शुक्रवार को जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर पहुँचकर प्रदर्शन किया अभिभावकों ने कलेक्टर से इच्छा मृत्यु की मांग की है।

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