Video: गुजरात में कृषि बिल के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन, राजभवन तक किया मार्च

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केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए कृषि बिल का विरोध पूरे देश में देखा जा रहा है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में इसके खिलाफ विरोO किया जा रहा है। अब गुजरात में भी कृषि बिल के विरोध आंदोलन छिड़ गया है। कांग्रेस कृषि बिल के खिलाफ उग्र प्रदर्शन कर रही है।

सोमवार को कांग्रेस ने विधानसभा परिसर के सामने सरदार पटेल की प्रतिमा के पास विरोध किया। कांग्रेस ने सरदार पटेल की प्रतिमा से राजभवन तक मार्च निकाली। विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा और विपक्ष के नेता परेश धनानी सहित नेता मौजूद थे।

मानसून सत्र में संसद द्वारा पारित किसानों और राजनीतिक दलों, किसानों और कृषि संबंधी बिलों के लगातार विरोध के बीच मंजूरी दी गई है। गुजरात कांग्रेस आज गांधीनगर में प्रदर्शन कर रही है। विधानसभा परिसर के सामने सरदार पटेल की प्रतिमा के पास कांग्रेस द्वारा कृषि बिल को किसान विरोधी बताते हुए प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

कांग्रेस के कई नेता हिरासत में

हालाकि इस दौरान कांग्रेस के नेता अमित चावड़ा , परेश धनानी , बलदेवजी ठाकोर को गिरफ्तार कर लिया गया है। अमित चावड़ा ने बताया कि इस कृषि विरोधी बिल के कारण किसानों का राज खतम हो जायेगा। केन्द्र की मोदी सरकार में किसानों की हालत नाजुक हो गई है। किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो गये है। किसानों की आवाज दबा कर केन्द्र सरकार लोकतंत्र का हनन कर रही है। कांग्रेस कभी भी ऐसा नहीं होने देगी।

कृषि बिल को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संसद द्वारा पारित तीनों कृषि विधेयकों (Farm Bill) को रविवार को स्वीकृति दे दी है। इन विधेयकों का पूरे देश में विपक्ष और किसानों द्वारा भारी विरोध हो रहा है. खासकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के किसान इसे ‘काला कानून’ बताकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर निशाना साध रहा है।

गौरतलब है कि पिछले रविवार उच्च सदन में केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा चर्चा के लिए लाए गए दो अहम विधेयक, ‘कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) विधेयक 2020 और कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020’ पर विपक्षी दलों के सांसदों ने पुरजोर विरोध करते हुए दोनों विधेयकों को किसानों के हितों के खिलाफ और कॉरपोरेट को फायदा दिलाने की दिशा में उठाया गया कदम करार दिया था।

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