पाकिस्तान में चीनी 100 रुपये किलो के भाव क्यों बिक रही है

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पाकिस्तान ने 50,000 टन चीनी खरीदने के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया है। लेकिन, ये आयात भारत के लिए नहीं हैं क्योंकि पाकिस्तान ने भारत को प्रतिबंधित देशों की लिस्ट में डाला हुआ है। पाकिस्तान के इस फैसले को घरेलू चीनी कारोबारियों ने पड़ोसी देश के लिए ‘बेड लक’ बताया है।

पाकिस्तान ने तीसरी बार ऐसे टेंडर जारी किया है। इससे पहले दो टेंडर जारी किये गये लेकिन उन्हें ज्यादा बोली मिलने के कारण रद्द कर दिया गया।

पाकिस्तान में चीनी के उत्पादन में कमी आई है जिसके कारण वहां चीनी की कीमतें घरेलू रिटेल बाजार में 100 रुपये किलो तक पहुंच गई है। पाकिस्तान पर भारत आयात बैन करना महंगा पड़ रहा है। 

पिछले सप्ताह पाकिस्तान की आर्थिक समन्वय समिति द्वारा भारत से इन दोनों वस्तुओं के आयात की अनुमति देने के बाद चीनी और कपास में दोनों देशों के बीच व्यापार फिर से खुलने की उम्मीद थी। हालांकि, पाकिस्तान के संघीय मंत्रिमंडल ने फैसले को वापस ले लिया।

चीनी के व्यापार में सट्टा कैसे खेला जाता है?

विशेषज्ञों का कहना है कि सट्टेबाज़ अटकलबाज़ी से चीनी की क़ीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ाते हैं. ये सट्टेबाज़ तय करते हैं कि अगर आज चीनी की क़ीमत 80 रुपये प्रति किलोग्राम है, तो इसे अगले महीने 90 रुपये तक बढ़ाना है, जिसके लिए वो एक कृत्रिम संकट पैदा करते हैं.

चीनी के व्यापार से जुड़े व्यापारी वहीद मेमन ने कहा कि यह सट्टा दो तरह से खेला जाता. पहला तो ये कि सट्टेबाज़ शुगर मिल से, ये तय करके बयाना देते हैं कि वो आने वाले समय में डिलीवरी उठा लेंगे.

दूसरा तरीक़ा ये है कि चीनी के व्यापारी आपस में तय करके चीनी का सौदा कर लेते हैं, जिसमें न बयाना शामिल होता है और न ही फिज़िकली चीनी की डिलीवरी होती है.

वहीद ने कहा कि अगर बाज़ार में चीनी की मौजूदा क़ीमत 90 रुपये प्रति किलोग्राम है, तो सट्टेबाज़ ऊंची क़ीमत पर भविष्य के सौदे करना शुरू कर देते हैं. चीनी मिलें भी अधिक क़ीमत पर ये सौदा करती हैं, लेकिन इसमें चीनी की फिज़िकली डिलीवरी नहीं होती है.

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